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दो साल, छेड़छाड़ की तीन घटनाएं, चार आदेश फिर भी स्कूल बसों में महिला कंडक्टर नहीं
उज्जैन । 575 स्कूल बसें दौड़ रही हैं। इनसे 14 हजार बच्चे रोज स्कूल जाते हैं, इसमें 60 फीसदी से ज्यादा छात्राएं हैं। एक बच्चे से औसत 800 रुपए स्कूल बस फीस हर महीने ली जाती है। यानी 14 हजार बच्चों के अभिभावक इन्हें 1 करोड़ 15 लाख रुपए हर महीने देते हैं। इतनी कमाई के बावजूद बसों में 4000 रुपए महीना खर्च कर महिला कंडक्टर नहीं रखी जा रही है। नतीजतन बेटियां स्कूल बसों में असुरक्षित हैं। इधर जिम्मेदार अफसर इतने संवेदनशील मामले में भी ठोस कार्रवाई करने को तैयार नहीं हैं। 9वीं की छात्रा से स्कूल बस में छेड़छाड़ का मामला उजागर होने के दूसरे दिन गुरुवार को भी जिला प्रशासन की आंख नहीं खुली। आरटीओ ने तो जैसे कोई कार्रवाई नहीं करने की ठान रखी है। शिक्षा विभाग के अफसर को भी जैसे कोई लेना-देना नहीं है।
इसी बीच छेड़छाड़ की शिकार छात्रा को गुरुवार को उसके पिता ने हिम्मत दिलाई। मां ने कहा- तू तो हिम्मतवाली है। बदमाशों का सामना कर सकती है तो फिर स्कूल जाने से क्या डरना। पिता स्कूल ले गए। हिंदी का पेपर दिलवाया। अपने साथ वापस लेकर आए। छात्रा ने भास्कर से कहा- डरूंगी नहीं, स्कूल जाऊंगी, अपनी पढ़ाई पूरी करूंगी। इधर घटना के विरोध में गुरुवार दोपहर युवक कांग्रेस के पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं ने जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय का घेराव किया। युकां के उज्जैन उत्तर विधानसभा अध्यक्ष प्रतीक जैन व सुभाष यादव सहित कार्यकर्ताओं ने घटना की निंदा करते हुए डीईओ संजय गोयल को ज्ञापन दिया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने मांग की कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए सभी स्कूल बसों में महिला परिचालक की नियुक्ति करने के प्रावधान को सख्ती के साथ पालन करवाया जाए।